परीक्षा लीक प्रूफ बनाने वाली नई टास्क फोर्स की सबसे बड़ी ताकत क्या है

On: July 27, 2026 12:49 AM
Exam Leak-Proof Task Force

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और परीक्षा प्रणाली में आमूल-चूल बदलाव के लिए एक नई टास्क फोर्स का गठन किया है। इसकी अगुवाई इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। टास्क फोर्स का मुख्य लक्ष्य परीक्षाओं को लीक-प्रूफ बनाना और पारदर्शिता बढ़ाना है।

टास्क फोर्स में तकनीक, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और प्रशासन के क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, सदस्यों के चयन में काफी सोच-विचार किया गया है। टीम सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी।

नंदन नीलेकणि की भूमिका

नंदन नीलेकणि तकनीक और डेटा सिक्योरिटी में सुधार ला सकते हैं। आधार और यूपीआई जैसे पारदर्शी डिजिटल सिस्टम का अनुभव उनके पास है। वे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म विकसित कर सकते हैं जो हैक होना मुश्किल हो।

इससे परीक्षार्थियों का डेटा सुरक्षित रहेगा। एआई आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन से नकली उम्मीदवारों की पहचान भी संभव होगी। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।

तकनीकी सुरक्षा के विशेषज्ञ

आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी सॉफ्टवेयर और सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर को साइबर अटैक से बचा सकते हैं। कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं में डायनामिक रैंडमाइजेशन लागू किया जा सकता है। इससे हैकिंग और स्क्रीन शेयरिंग जैसी गड़बड़ियां कम होंगी।

पूर्व इसरो चीफ एस. सोमनाथ जीरो-एरर प्रोसेस और साइबर इंटेलिजेंस का अनुभव ला सकते हैं। स्पेस मिशन जैसे मल्टी-लेयर चेक लागू किए जा सकते हैं। सवाल पत्र तैयार करने से लेकर रिजल्ट तक हर स्टेज पर सुरक्षा मजबूत होगी।

खुफिया और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ

पूर्व आईबी डायरेक्टर तपन डेका परीक्षा माफिया और पेपर लीक गैंग को पकड़ने के लिए इंटेलिजेंस नेटवर्क सुझा सकते हैं। रियल-टाइम साइबर मॉनिटरिंग से लीक होने से पहले ही संदिग्ध गतिविधियों की पहचान हो सकेगी। परीक्षा केंद्रों की सख्त ऑडिट भी संभव होगी।

लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट अमृत लाल मीना सवाल पत्रों की छपाई, स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट के लिए टैम्पर-प्रूफ उपाय सुझा सकते हैं। जीपीएस ट्रैकिंग और डिजिटल लॉक वाले कंटेनर इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इससे पेपर गायब होने या फोटो खींचे जाने जैसी घटनाएं रुकेंगी।

शैक्षणिक सुधार की भूमिका

पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल अकादमिक सुधार और छात्र नीति में योगदान दे सकती हैं। सीबीएसई चेयरपर्सन रह चुकी हैं। ग्रेस मार्क्स, आंसर की आपत्ति और परीक्षा केंद्रों के लिए सख्त एसओपी सुझा सकती हैं।

इन उपायों से मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी। छात्रों की समस्याओं का तेज और न्यायसंगत समाधान भी संभव होगा। परीक्षा प्रणाली में विश्वास बढ़ेगा।

Shamshul Hoda

Shamshul Hoda, National Dastak में शिक्षा, रोजगार और करियर से जुड़े विषयों पर लेखन करते हैं। वे एक शिक्षक भी हैं और सरकारी एवं निजी नौकरियों, परीक्षा, रिजल्ट, एडमिट कार्ड, स्कॉलरशिप तथा करियर गाइडेंस से संबंधित विषयों पर सटीक, तथ्यात्मक और उपयोगी जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं।