नई दिल्ली: आयकर विभाग ने एसेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 (वित्तीय वर्ष 2025-26) के लिए नए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म अधिसूचित कर दिए हैं। इस बार आयकर रिटर्न दाखिल करते समय नौकरीपेशा, व्यापारियों, निवेशकों और पेशेवर करदाताओं को अपनी आय, निवेश और व्यक्तिगत ब्योरे से जुड़ी कई अतिरिक्त जानकारियां साझा करनी होंगी।
विभाग का मुख्य उद्देश्य टैक्स चोरी रोकना, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) के डेटा के साथ करदाताओं द्वारा दी गई जानकारी का सटीक मिलान (Data Reconciliation) करना है।
मुख्य बदलाव एक नजर में: अब ITR फॉर्म में सेकेंडरी एड्रेस (Secondary Address) दर्ज करना, राजनीतिक दलों को दिए गए चंदे पर PAN डिटेल देना और F&O (Futures & Options) ट्रेडिंग का अलग से ब्योरा देना अनिवार्य कर दिया गया है।
नए ITR फॉर्म्स में हुए प्रमुख बदलाव और नई शर्तें
| क्रम | बदलाव का क्षेत्र | विवरण व प्रभाव |
| 1 | सेकेंडरी एड्रेस व संपर्क जानकारी | सभी ITR फॉर्म्स (ITR-1 से ITR-7) में प्राइमरी एड्रेस के साथ सेकेंडरी एड्रेस और अतिरिक्त मोबाइल नंबर/ईमेल आईडी का नया कॉलम जोड़ा गया है। |
| 2 | ITR-1 में 2 मकानों की अनुमति | अब दो हाउस प्रॉपर्टी (Two House Properties) से आय प्राप्त करने वाले व्यक्ति भी सरल ITR-1 (Sahaj) फॉर्म का उपयोग कर सकेंगे। |
| 3 | राजनीतिक चंदा (धारा 80GGC) | राजनीतिक दलों को दिए गए दान पर टैक्स छूट दावा करने के लिए अब संबंधित राजनीतिक दल का नाम और PAN नंबर देना अनिवार्य होगा। |
| 4 | दान व दानकर्ता का सत्यापन (धारा 80G) | धारा 80G के तहत छूट के लिए बैंक ट्रांजेक्शन रेफरेंस नंबर (UPI/NEFT/RTGS/Cheque) और बैंक का IFSC कोड दर्ज करना होगा। |
| 5 | F&O ट्रेडिंग का अलग ब्योरा (ITR-3) | फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) और इंट्राडे ट्रेडिंग करने वाले व्यापारियों के लिए ITR-3 में टर्नओवर व लाभ-हानि की अलग से रिपोर्टिंग अनिवार्य की गई है। |
ITR-1 और ITR-2 का दायरा बढ़ा; दूर होंगी पत्राचार की समस्याएं
साधारण करदाताओं के लिए उपयोग किए जाने वाले ITR-1 (सहज) के नियमों में राहत देते हुए अब इसमें 2 मकानों से होने वाली आय और धारा 112A के तहत 1.25 लाख रुपये तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) को दर्ज करने की छूट दी गई है। हालांकि, यदि कोई कैपिटल लॉस (घाटा) कैरी फॉरवर्ड करना हो, तो करदाता को ITR-2 का ही उपयोग करना होगा।
इसके अतिरिक्त, आयकर विभाग ने सभी फॉर्म्स में संपर्क विवरण को मजबूत किया है। कई बार आधिकारिक नोटिस या ईमेल प्राथमिक पते पर न पहुंचने के कारण पत्राचार में बाधा आती थी। नए सेकेंडरी एड्रेस और सेकेंडरी कांटेक्ट नंबर के प्रावधान से विभाग और करदाता के बीच संचार अधिक सुगम और पारदर्शी होगा।
शेयर बाजार के ट्रेडर्स और कारोबारियों के लिए सख्त हुए नियम
शेयर बाजार में F&O और इंट्राडे ट्रेडिंग करने वाले करदाताओं पर इस वर्ष विभाग की विशेष नजर रहेगी। ITR-3 में F&O ट्रेडिंग का स्पष्ट ब्योरा मांगा गया है, जिससे बैंक खातों और ब्रोकर द्वारा AIS में दर्ज आंकड़ों का सीधे तौर पर मिलान किया जा सके।
इसके साथ ही, धारा 80DD और 80U के तहत विकलांगता राहत का दावा करने वालों के लिए भी विस्तृत श्रेणियां (जैसे ऑटिज्म, दृष्टिहीनता, मानसिक बीमारी आदि) चुनना अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि केवल पात्र व्यक्ति ही इसका लाभ उठा सकें।
करदाताओं के लिए अंतिम तिथि और महत्वपूर्ण सलाह
गैर-ऑडिट श्रेणी वाले व्यक्तिगत करदाताओं, वेतनभोगियों और पेंशनभोगियों के लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 तय की गई है। वहीं, बिजनेस आय वाले या टैक्स ऑडिट की आवश्यकता वाले करदाताओं के लिए समय सीमा 31 अगस्त 2026 है।
कर विशेषज्ञों का सुझाव है कि रिटर्न दाखिल करने से पहले करदाता अपना AIS, TIS और फॉर्म 26AS (फॉर्म 168) डाउनलोड कर सभी आंकड़ों का मिलान अवश्य कर लें, ताकि किसी भी प्रकार का मिसमैच या आयकर विभाग का नोटिस आने की संभावना न रहे।











