नई दिल्ली: भारत एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता के लिए चुनाव लड़ रहा है। 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत ने अपनी उम्मीदवारी पेश की है। इस बीच चीन की प्रतिक्रिया और विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बना दिया है।
भारत लंबे समय से UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है। अस्थायी सदस्यता के जरिए भारत UNSC में अपनी सक्रिय भूमिका दिखाना चाहता है। 2028 के चुनाव में भारत की उम्मीदवारी को कई देशों का समर्थन प्राप्त है।
चीन की प्रतिक्रिया
चीन ने भारत की इस उम्मीदवारी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि UNSC में सुधार की जरूरत है, लेकिन उसने भारत की उम्मीदवारी का सीधा समर्थन नहीं किया। चीन UNSC में अपने प्रभाव को बनाए रखना चाहता है और नए सदस्यों के आने से अपना वीटो पावर प्रभावित होने से चिंतित है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन की प्रतिक्रिया पर कहा कि UNSC को 21वीं सदी की वास्तविकताओं के अनुरूप ढाला जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि भारत जैसे बड़े और जिम्मेदार देशों को UNSC में ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
भारत की उम्मीदवारी
भारत 2028-29 के लिए UNSC की अस्थायी सदस्यता के लिए चुनाव लड़ रहा है। पिछले कई वर्षों में भारत UNSC में दो बार अस्थायी सदस्य रह चुका है। इस बार भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र से उम्मीदवार है।
जयशंकर ने कहा कि भारत UNSC में शांति, सुरक्षा और बहुपक्षीयता को मजबूत करने के लिए काम करेगा। भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, जलवायु परिवर्तन और विकासशील देशों के हितों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाएगा।
UNSC सुधार की मांग
भारत लंबे समय से UNSC सुधार की मांग कर रहा है। वर्तमान में UNSC में 5 स्थायी सदस्य (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन) हैं। भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील (G4) समूह UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है।
चीन इस सुधार का सबसे बड़ा विरोधी है। वह भारत और जापान की स्थायी सदस्यता का विरोध करता आया है।
जयशंकर का बयान
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में कहा कि UNSC को और ज्यादा समावेशी बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1945 का ढांचा आज की दुनिया के अनुरूप नहीं है। भारत 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करता है और वैश्विक शांति व सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समर्थन
भारत को अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और कई अन्य देशों का समर्थन प्राप्त है। अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी देश भी UNSC सुधार का समर्थन कर रहे हैं।
चुनौतियां
चीन के विरोध के अलावा, UNSC सुधार के लिए चार्टर संशोधन की जरूरत है। इसमें 2/3 बहुमत और 5 स्थायी सदस्यों की सहमति आवश्यक है। ऐसे में प्रक्रिया लंबी और जटिल है।
निष्कर्ष
भारत की UNSC अस्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी महत्वपूर्ण कदम है। यह न सिर्फ भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करेगा बल्कि UNSC सुधार की दिशा में भी आगे बढ़ाएगा। चीन की प्रतिक्रिया के बावजूद भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।
2028 का चुनाव भारत के लिए एक नया अवसर होगा। दुनिया भर की नजरें अब इस पर टिकी हुई हैं कि भारत UNSC में अपनी उपस्थिति को कैसे प्रभावी बनाता है।











