छपरा: बिहार के सारण जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है। जिले में योजना के तहत स्वीकृत 6358 घर अभी भी अधूरे पड़े हैं। भले ही केंद्र और राज्य सरकार ने इन घरों के लिए करोड़ों रुपये जारी कर दिए हों, लेकिन निर्माण कार्य ठप पड़ा है। इस वजह से गरीब परिवारों को अपना घर मिलने में देरी हो रही है।
जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, सारण में पीएम आवास योजना के अंतर्गत कुल स्वीकृत घरों में से एक बड़ी संख्या अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। कई लाभार्थी लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उनके घरों का निर्माण कार्य या तो बीच में रुक गया है या बेहद धीमी गति से चल रहा है।
योजना की स्थिति
सारण जिले में पीएम आवास योजना ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में चल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश घरों का निर्माण अधर में लटका हुआ है। कई जगहों पर नींव तक काम हो गया है, लेकिन दीवारें और छत नहीं बन पाई हैं। कुछ जगहों पर तो सिर्फ पिलर खड़े हैं और निर्माण पूरी तरह बंद है।
जिला प्रशासन के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि कुछ स्थानों पर सामग्री की कमी, मजदूरों की अनुपलब्धता और ठेकेदारों की लापरवाही के कारण काम रुक गया है। कुछ मामलों में लाभार्थियों और ठेकेदारों के बीच विवाद भी सामने आया है।
करोड़ों रुपये जारी, फिर भी काम नहीं
केंद्र सरकार और बिहार सरकार ने इस योजना के तहत सारण जिले को सैकड़ों करोड़ रुपये जारी किए हैं। फिर भी जमीनी स्तर पर प्रगति न के बराबर है। कई लाभार्थियों का आरोप है कि पैसा आने के बावजूद ठेकेदार काम शुरू नहीं कर रहे हैं या बीच में छोड़कर चले जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई गांवों में तो योजना की लिस्ट में नाम आने के बाद भी घर का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। कुछ लाभार्थी खुद अपने स्तर पर निर्माण करवा रहे हैं, लेकिन सरकारी सहायता नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी प्रयास और वास्तविकता
जिला प्रशासन ने कहा है कि अधूरे घरों को पूरा करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। ठेकेदारों को नोटिस जारी किए गए हैं और जिन लोगों ने काम नहीं किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
लेकिन स्थानीय स्तर पर स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है। कई पंचायतों में अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है और कहा है कि पीएम आवास योजना बिहार में कागजों पर सफल है, लेकिन जमीन पर फेल हो रही है।
लाभार्थियों की समस्याएं
अधूरे घरों के कारण कई गरीब परिवार अभी भी झोपड़ियों या किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। बारिश के मौसम में इन अधूरे घरों में पानी भर जाता है, जिससे निर्माण सामग्री खराब हो रही है।
कुछ लाभार्थियों ने बताया कि उन्होंने बैंक से लोन भी लिया था, लेकिन घर पूरा न होने के कारण वे EMI भरने में परेशानी महसूस कर रहे हैं।
सरकार क्या कहती है?
बिहार सरकार का दावा है कि पीएम आवास योजना के तहत राज्य में लाखों घर बनाए जा चुके हैं। लेकिन सारण जैसे जिलों में कुछ तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं के कारण देरी हो रही है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी अधूरे घर पूरे कर दिए जाएंगे।
निष्कर्ष
सारण जिले में पीएम आवास योजना की हालत चिंताजनक है। 6358 अधूरे घर गरीबों के सपनों को अधर में लटकाए हुए हैं। अब जरूरत है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग सख्ती से काम पूरा करवाएं, ताकि योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके।










