घोटाले का खुलासा
ग्वालियर में आवारा कुत्तों की स्टेरलाइजेशन (नसबंदी) योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है। एक वेटरनरी डॉक्टर पर फर्जी एफिडेविट बनाने और जमा करने का आरोप लगा है। ग्वालियर नगर निगम (GMC) ने इस मामले में डॉक्टर के खिलाफ FIR दर्ज कराई है।
क्या है पूरा मामला
नगर निगम के अनुसार, डॉक्टर ने कई कुत्तों की नसबंदी नहीं की, लेकिन फर्जी प्रमाण-पत्र और एफिडेविट बनाकर नगर निगम को जमा कर दिए। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने भुगतान भी प्राप्त किया। जब नगर निगम ने वेरिफिकेशन किया तो कई मामलों में कुत्तों की नसबंदी नहीं पाई गई, जबकि डॉक्टर ने नसबंदी का दावा किया था।
FIR और आरोप
नगर निगम ने डॉक्टर के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज बनाने और सरकारी धन का गबन करने के आरोप में FIR दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्राथमिक जांच में पाया गया कि कई कुत्तों पर नसबंदी का निशान (टैटू) भी नहीं था, जबकि डॉक्टर ने नसबंदी होने का प्रमाण-पत्र दिया था।
नगर निगम की प्रतिक्रिया
ग्वालियर नगर निगम के अधिकारी ने कहा कि इस घोटाले में कितना सरकारी पैसा गबन हुआ है, इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि पूरे अभियान की ऑडिट कराई जाएगी और दोषी पाए गए किसी भी अधिकारी या ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम ने आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए केंद्र और राज्य सरकार से फंड प्राप्त किया था।
ग्वालियर में आवारा कुत्तों की समस्या
ग्वालियर में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले कुछ वर्षों में कुत्तों के काटने के कई मामले सामने आए हैं, जिसमें बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। नगर निगम ने नसबंदी अभियान चलाकर इस समस्या को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन अब इस अभियान में ही घोटाले का खुलासा होने से विवाद बढ़ गया है।
जांच की स्थिति
पुलिस ने डॉक्टर से पूछताछ शुरू कर दी है। मामले में और लोगों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। नगर निगम ने सभी पुराने दस्तावेजों की जांच का आदेश दिया है। अगर बड़े स्तर पर घोटाला पाया गया तो और FIR दर्ज की जा सकती है।









