अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान की कथित चोरी का मामला अब बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार पर सीधा हमला बोला है।
केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में सवाल उठाया कि करोड़ों रुपये की चोरी होने के बावजूद अब तक FIR क्यों दर्ज नहीं की गई। उन्होंने पूछा कि सरकार किसे बचा रही है।
केजरीवाल का आरोप
केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। उसी मंदिर से करोड़ों रुपये का चढ़ावा और सामान गायब हो गया। फिर भी यूपी पुलिस, ED या CBI में से किसी ने FIR दर्ज नहीं की।
उन्होंने दावा किया कि इस मामले में बड़े-बड़े लोग शामिल हो सकते हैं। केजरीवाल ने मांग की कि दोषियों को जेल भेजा जाए, चाहे वे कितने भी बड़े क्यों न हों।
चोरी के आरोप और दावे
मामले में व्यापारियों और भक्तों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के उत्तर भारत प्रमुख अनुराग रस्तोगी ने बताया कि उन्होंने 3 किलो चांदी का दीपक दान में दिया था, जो गायब है।
रस्तोगी ने दावा किया कि पहले चरण में 34 किलो से ज्यादा चांदी जमा की गई थी, जिसे मंदिर की नींव में इस्तेमाल करना था। लेकिन भूमि पूजन के समय यह चांदी नहीं मिली।
कुल मिलाकर 200 करोड़ रुपये से ज्यादा के कैश और आभूषण गायब होने के आरोप लगे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में जमीन सौदों में भी अनियमितताओं का जिक्र है।
SIT जांच शुरू
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT गठित की है। टीम ने मंदिर ट्रस्ट की मांग पर कार्रवाई शुरू की। SIT ने अब तक कई लोगों से पूछताछ की और CCTV फुटेज खंगाले हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच में पूर्ण पारदर्शिता का भरोसा दिया है। ट्रस्ट ने भी कहा है कि आंतरिक ऑडिट में कोई गड़बड़ी नहीं मिली, लेकिन आरोपों की जांच हो रही है।
विपक्ष का हमला
आम आदमी पार्टी के अलावा समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने भी सरकार पर निशाना साधा है। अखिलेश यादव ने महाघोटाले का आरोप लगाते हुए न्यायिक जांच की मांग की।
संजय सिंह जैसे AAP नेताओं ने राम मंदिर से जुड़ी पवित्र वस्तुओं की चोरी तक का जिक्र किया। विपक्ष का कहना है कि आस्था के नाम पर जमा धन की सुरक्षा जरूरी है।
BJP और ट्रस्ट की स्थिति
भाजपा और राम मंदिर ट्रस्ट ने इन आरोपों को गंभीरता से लिया है। कुछ भाजपा नेताओं ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की। विनय कटियार जैसे राम जन्मभूमि आंदोलन के पुराने नेताओं ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही।
ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि जांच में सहयोग किया जा रहा है। SIT की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
राजनीतिक माहौल
यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब राम मंदिर पूरे देश की आस्था का प्रतीक बन चुका है। लाखों भक्तों द्वारा दिए गए दान की सुरक्षा पर सवाल उठने से राजनीतिक तापमान बढ़ गया है।
विश्लेषकों का कहना है कि SIT की जांच का नतीजा इस विवाद को शांत या और भड़का सकता है। फिलहाल विपक्ष इस मुद्दे को भविष्य के चुनावों में इस्तेमाल करने की रणनीति बना रहा है।
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट पर करोड़ों रुपये का दान आता रहा है। ऐसे में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।
केजरीवाल के बयान के बाद विवाद और तेज हो गया है। सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि जल्द से जल्द FIR दर्ज कर दोषियों को सजा दिलाई जाए।
देश भर में इस मुद्दे पर चर्चा जारी है। राम मंदिर से जुड़े किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त न करने का संदेश सभी तरफ से आ रहा है।










