भारत में जैकफ्रूट की खेती कई जगहों पर होती है, लेकिन एक जगह है जहां यह फल न सिर्फ बड़े पैमाने पर उगाया जाता है बल्कि उसकी गुणवत्ता और व्यापार की वजह से पूरी दुनिया में पहचान बना चुका है।
तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले में बसा पनरुति शहर भारत की जैकफ्रूट कैपिटल के नाम से जाना जाता है।
पनरुति की जैकफ्रूट खेती की विशेषता
पनरुति में साल भर जैकफ्रूट की खेती होती है। यहां की मिट्टी, जलवायु और किसानों का अनुभव इस फल को विशेष बनाते हैं। पनरुति के जैकफ्रूट मीठे, रसीले और मलाईदार होते हैं।
एक पेड़ से औसतन 150 से 250 फल तक मिल सकते हैं। किसान पीढ़ी दर पीढ़ी इस खेती से जुड़े हुए हैं।
GI टैग और वैश्विक पहचान
पनरुति के जैकफ्रूट को Geographical Indication (GI) टैग मिला है। यह टैग इस बात की गारंटी देता है कि पनरुति का जैकफ्रूट अपनी अनोखी गुणवत्ता के लिए जाना जाता है।
यह टैग स्थानीय किसानों को बेहतर मूल्य दिलाता है और निर्यात को बढ़ावा देता है। कई देशों में पनरुति का जैकफ्रूट निर्यात होता है।
आर्थिक महत्व
जैकफ्रूट की खेती पनरुति की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हजारों परिवार इस फसल पर निर्भर हैं। फल के अलावा बीज, छाल और पत्तियों का भी उपयोग होता है।
स्थानीय बाजार में जैकफ्रूट की भारी खरीद-बिक्री होती है। पर्यटक भी यहां आकर जैकफ्रूट उत्पादों का स्वाद लेते हैं।
पर्यटन की संभावनाएं
पनरुति को जैकफ्रूट कैपिटल बनाने के प्रयास चल रहे हैं। यहां जैकफ्रूट फेस्टिवल, फार्म विजिट और प्रोसेसिंग यूनिट्स पर्यटकों को आकर्षित कर सकती हैं।
जैकफ्रूट से बने चिप्स, पापड़, जूस और अन्य उत्पाद पर्यटकों के लिए यादगार अनुभव बनाते हैं।
चुनौतियां और भविष्य
जैकफ्रूट की खेती में मौसम, कीट और बाजार की अनिश्चितता चुनौतियां हैं। लेकिन सरकारी योजनाएं और आधुनिक तकनीक इनका समाधान कर रही हैं।
भविष्य में पनरुति जैकफ्रूट प्रोसेसिंग हब बन सकता है। इससे रोजगार बढ़ेगा और किसानों की आय में इजाफा होगा।
निष्कर्ष
पनरुति भारत की जैकफ्रूट कैपिटल के रूप में अपनी अनोखी पहचान बना चुका है। यह शहर कृषि, अर्थव्यवस्था और पर्यटन के लिए एक बेहतरीन उदाहरण है।
जैकफ्रूट की खेती को बढ़ावा देकर हम न सिर्फ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं बल्कि स्वस्थ और टिकाऊ कृषि की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं।









