लखनऊ: ‘एक देश-एक चुनाव’ को लेकर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष और राजस्थान के पाली से सांसद प्रेम प्रकाश चौधरी (पीपी चौधरी) ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि देश के 99 प्रतिशत मतदाता इस व्यवस्था के पक्ष में हैं और इसके लागू होने से देश की अर्थव्यवस्था को करीब सात लाख करोड़ रुपये का फायदा होगा।
बुधवार को लखनऊ में मीडिया से बातचीत करते हुए पीपी चौधरी ने कहा कि समिति अब तक दस राज्यों का दौरा कर चुकी है। इन दौरों के दौरान ज्यादातर लोगों ने एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने का समर्थन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव किसी एक राजनीतिक दल के फायदे के लिए नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र हित में है।
बार-बार चुनाव का भारी खर्च
पीपी चौधरी ने कहा कि बार-बार चुनाव कराने से प्रशासनिक व्यवस्था, विकास कार्य, शिक्षा और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है। चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण विकास परियोजनाएं रुक जाती हैं। बेसिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होती है। प्रवासी मजदूरों को बार-बार अपने गृह राज्य लौटना पड़ता है, जिससे उद्योग और निर्माण क्षेत्र ठप हो जाते हैं।
उन्होंने अनुमान लगाया कि एक देश-एक चुनाव लागू होने पर देश को करीब 7 लाख करोड़ रुपये की बचत होगी। यह राशि विकास कार्यों, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में लगाई जा सकती है।
ऐतिहासिक संदर्भ
चौधरी ने याद दिलाया कि 1952 से 1967 तक देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होते थे। उस समय संघीय ढांचे पर कोई खतरा नहीं था। बाद में 1968 में कांग्रेस सरकार ने कुछ विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर चुनाव कराए। आपातकाल के दौरान चुनाव टलने से यह व्यवस्था बिगड़ गई।
उन्होंने कहा कि संघीय ढांचे पर उठ रहे सवाल निराधार हैं। एक साथ चुनाव लोकतंत्र को मजबूत बनाएगा और राजनीतिक स्थिरता लाएगा।
चुनाव आयोग तैयार
पीपी चौधरी ने बताया कि चुनाव आयोग ने समिति को भरोसा दिया है कि अगर छह महीने का समय मिल जाए तो वह पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने में पूरी तरह सक्षम है। यदि संसद से संबंधित विधेयक 2028 में पास हो जाता है तो 2029 में पूरे देश में एक साथ चुनाव हो सकते हैं।
लखनऊ दौरा और जनमत
समिति तीन दिन के लखनऊ दौरे पर थी। यहां विभिन्न वर्गों के लोगों से राय ली गई। जेपीसी अध्यक्ष ने कहा कि लखनऊ में भी व्यापक समर्थन मिला। उन्होंने दस राज्यों के अनुभव साझा करते हुए कहा कि लगभग हर जगह जनता एक देश-एक चुनाव के पक्ष में है।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
कुछ विपक्षी दल इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने इसे संघीय ढांचे पर हमला बताया है। लेकिन पीपी चौधरी ने इन दावों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल अपनी प्रतिबद्धताओं के कारण विरोध कर सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखना चाहिए।
लाभ और चुनौतियां
एक देश-एक चुनाव से न सिर्फ आर्थिक बचत होगी बल्कि लोकतांत्रिक भागीदारी भी बढ़ेगी। विदेश में रह रहे भारतीयों के लिए भी मतदान आसान हो जाएगा। हालांकि कुछ चुनौतियां भी हैं। जैसे- बड़े स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था, मतदान सामग्री की व्यवस्था और ईवीएम की उपलब्धता।
चुनाव आयोग ने इन चुनौतियों से निपटने की तैयारी का भरोसा दिया है।
निष्कर्ष
पीपी चौधरी का कहना है कि ‘एक देश-एक चुनाव’ लोकतंत्र को और मजबूत बनाएगा। यह व्यवस्था विकास को नई गति देगी और देश को आर्थिक रूप से मजबूत करेगी। समिति अपनी रिपोर्ट तैयार कर संसद को सौंपेगी।
देशभर में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो भारतीय लोकतंत्र का एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।











