नई दिल्ली: लद्दाखी सामाजिक कार्यकर्ता और इनोवेटर सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल अब 18वें दिन पहुंच गई है। उनकी सेहत तेजी से बिगड़ रही है, जिसके चलते पूर्व जम्मू-कश्मीर गवर्नर और वरिष्ठ नेता डॉ. करण सिंह ने उनसे हड़ताल समाप्त करने की अपील की है।
डॉ. करण सिंह ने बुधवार को एक बयान जारी कर सोनम वांगचुक की चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वांगचुक का योगदान लद्दाख और देश के लिए अनमोल है। उनकी सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। करण सिंह ने वांगचुक से अनुरोध किया कि वे अपनी मांगों को आगे बढ़ाने के अन्य लोकतांत्रिक तरीके अपनाएं और भूख हड़ताल खत्म करें।
हड़ताल का मकसद
सोनम वांगचुक जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। उनकी मुख्य मांगें शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई, परीक्षा पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को लेकर बेहतर नीतियां हैं। वे लद्दाख की विशेष स्थिति और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर भी जोर दे रहे हैं।
हड़ताल के दौरान बड़ी संख्या में समर्थक उनके साथ जंतर मंतर पर पहुंच रहे हैं। कई छात्र संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता भी उनके समर्थन में उतरे हैं।
स्वास्थ्य की चिंता
चिकित्सकों के अनुसार, 18 दिनों की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक का वजन काफी कम हो गया है। उनकी सेहत बिगड़ने के संकेत दिख रहे हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर हड़ताल लंबी खिंची तो जान को खतरा हो सकता है।
कोर्ट में भी इस मामले को लेकर याचिका दायर की गई है, जिसमें चिकित्सकीय हस्तक्षेप की मांग की गई है।
करण सिंह का योगदान
डॉ. करण सिंह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से गहरा जुड़ाव रखते हैं। उन्होंने लंबे समय तक राज्यपाल के रूप में सेवा की है। वांगचुक जैसे कार्यकर्ताओं के साथ उनका पुराना संबंध रहा है। उनकी अपील को काफी महत्व दिया जा रहा है।
करण सिंह ने कहा कि वांगचुक की मांगें जायज हैं, लेकिन स्वास्थ्य को खतरे में डालकर हड़ताल जारी रखना उचित नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से भी अपील की कि वांगचुक की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए।
सरकार की भूमिका
अभी तक केंद्र सरकार की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लद्दाख प्रशासन और शिक्षा मंत्रालय पर दबाव बढ़ रहा है। कई विपक्षी नेता और छात्र संगठन सरकार से बातचीत शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
पिछला संदर्भ
सोनम वांगचुक इससे पहले भी कई बार भूख हड़ताल कर चुके हैं। वे लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने, पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा सुधार के मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। उनकी पहल से क्लाउड बर्स्ट जैसी प्राकृतिक आपदाओं पर जागरूकता बढ़ी है।
निष्कर्ष
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शिक्षा और परीक्षा सुधार को लेकर देशव्यापी चर्चा का विषय बन गई है। करण सिंह की अपील के बाद अब उम्मीद है कि जल्द कोई सकारात्मक समाधान निकलेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हड़ताल जल्द समाप्त होनी चाहिए, ताकि वांगचुक की सेहत को कोई स्थायी नुकसान न पहुंचे।
जनता और समर्थकों से अपील की जा रही है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से मुद्दे को उठाएं। सरकार को भी छात्रों और युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए।











