नई दिल्ली: लद्दाखी कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल अब 20वें दिन पहुंच गई है। बुधवार को उनकी सेहत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। जंतर-मंतर पर जारी Cockroach Janta Party (CJP) के प्रदर्शन में भीड़ लगातार बढ़ रही है। इस बीच विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी तेज हो गया है।
सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनकी मुख्य मांगें NEET और CBSE परीक्षा पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा पारदर्शिता और लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी हैं। 20 दिनों की हड़ताल के दौरान उनका वजन 9 किलोग्राम से ज्यादा कम हो चुका था।
स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक
डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक भूख रहने से सोनम वांगचुक की मांसपेशियां कमजोर हो गई हैं और उनके अंगों पर दबाव बढ़ रहा है। बुधवार को उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी मामले की सुनवाई की और स्वास्थ्य विभाग को नियमित रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।
CJP प्रदर्शन तेज
Cockroach Janta Party के बैनर तले चल रहे प्रदर्शन में सैकड़ों छात्र, युवा और किसान शामिल हो रहे हैं। राकेश टिकैत, अरविंद केजरीवाल, डिंपल यादव और महबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं ने पहले ही वांगचुक का समर्थन जताया था। प्रदर्शन स्थल पर भारी सुरक्षा व्यवस्था है।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि सोनम वांगचुक Gen-Z के भविष्य की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। अरविंद केजरीवाल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई। राकेश टिकैत ने किसानों और युवाओं के संघर्ष से इसे जोड़ा। कांग्रेस, सपा, डीएमके और अन्य विपक्षी दलों ने भी वांगचुक के साथ एकजुटता जताई है।
1984 का लेह आंदोलन याद
सोनम वांगचुक ने अपनी हड़ताल के दौरान 1984 के लेह आंदोलन का जिक्र किया था। उनके पिता सोनम वांगयाल ने तब ST दर्जे की मांग को लेकर अनशन किया था, जिसे इंदिरा गांधी ने खुद लेह जाकर समाप्त कराया था। इस ऐतिहासिक घटना की तुलना आज के आंदोलन से की जा रही है।
फिल्म इंडस्ट्री का साथ
बॉलीवुड से इमरान खान, सोनाक्षी सिन्हा, फातिमा सना शेख और अन्य कलाकारों ने सोशल मीडिया पर वांगचुक का समर्थन किया है। कई कलाकारों ने सरकार से संवाद शुरू करने की अपील की है।
सरकार की भूमिका
केंद्र सरकार अभी तक इस मामले पर कोई बड़ा बयान नहीं दे पाई है। शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा सुधार को लेकर कुछ कदम उठाने की बात कही है, लेकिन प्रदर्शनकारी इसे पर्याप्त नहीं मान रहे हैं। 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च को लेकर भी तैयारी चल रही है।
लद्दाख और शिक्षा मुद्दा
सोनम वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि युवाओं का भविष्य परीक्षा अनियमितताओं के कारण खतरे में है। लाखों छात्र इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर #SupportSonamWangchuk ट्रेंड कर रहा है। कई लोग उनकी हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं। कुछ लोग हड़ताल खत्म करने की अपील भी कर रहे हैं ताकि उनकी सेहत को कोई स्थायी नुकसान न हो।
निष्कर्ष
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल अब एक बड़े राष्ट्रीय मुद्दे का रूप ले चुकी है। अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उनका संघर्ष जारी है। विपक्ष और समाज के विभिन्न वर्गों का समर्थन बढ़ रहा है।
सरकार पर दबाव है कि वह छात्रों और युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से ले और संवाद का रास्ता अपनाए। फिलहाल सभी की नजरें सोनम वांगचुक की सेहत और 20 जुलाई के संसद मार्च पर टिकी हुई हैं।
यह आंदोलन साबित करता है कि शिक्षा और युवाओं के भविष्य का मुद्दा देश की राजनीति में कितना महत्वपूर्ण बन चुका है।







