महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर तीखा बयानबाजी शुरू हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ‘अब महाराष्ट्र में एक ही शिवसेना’ वाले बयान पर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने तेज प्रतिक्रिया दी है।
कोल्हापुर में एक कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने कहा कि अब शिंदे गुट या उद्धव गुट कहने की जरूरत नहीं रही। अब सिर्फ एक शिवसेना है। इस बयान ने सियासी घमासान को नया मोड़ दे दिया है।
अमित शाह का विवादित बयान
शनिवार को कोल्हापुर में देवी अंबाबाई मंदिर गलियारा परियोजना के उद्घाटन कार्यक्रम में अमित शाह ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का जिक्र किया।
शाह ने कहा कि पहले एकनाथ शिंदे का जिक्र करते समय शिवसेना शिंदे गुट कहना पड़ता था। लेकिन अब कोई गुट नहीं बचा है। अब सिर्फ एक शिवसेना है, जिसके प्रमुख एकनाथ शिंदे हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब शिवसेना (यूबीटी) में आंतरिक अस्थिरता की खबरें सामने आ रही हैं। कुछ सांसदों के शिंदे गुट में जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
संजय राउत का पलटवार
अमित शाह के बयान पर संजय राउत ने तीखा हमला बोला। राउत ने कहा कि एकनाथ शिंदे अमित शाह के टेस्ट ट्यूब बेबी हैं। यह बच्चा अभी चार साल का हुआ है।
राउत ने आरोप लगाया कि अमित शाह लगातार बालासाहेब ठाकरे की विरासत और शिवसेना का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने शाह पर मराठी अस्मिता को ठेस पहुंचाने का भी आरोप लगाया।
राउत ने कहा कि चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट पर राजनीतिक दबाव डालकर शिंदे गुट को शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न दिया गया। उन्होंने पूछा कि क्या अमित शाह अब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बन गए हैं।
मोदी पर साजिश का आरोप
संजय राउत ने आगे कहा कि अमित शाह का मूल व्यवसाय शेयर बाजार रहा है। अब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने की रणनीति बना रहे हैं।
राउत का दावा है कि इस प्रक्रिया में एकनाथ शिंदे को साथ लिया गया है। उन्होंने शाह पर उद्धव ठाकरे का अपमान करने का आरोप भी दोहराया।
राउत ने लोकसभा सांसदों के बारे में स्पष्ट किया कि जिन सांसदों के बगावत की बात हो रही है, वे अभी तक तकनीकी रूप से शिवसेना (यूबीटी) के ही सदस्य हैं। लोकसभा अध्यक्ष की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं आया है।
शाह का उद्धव ठाकरे पर हमला
अमित शाह ने अपने भाषण में उद्धव ठाकरे पर भी निशाना साधा। शाह ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे एनडीए छोड़कर कांग्रेस की गोद में बैठ गए हैं।
शाह ने कहा कि उद्धव ठाकरे घुसपैठियों को वोट बैंक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि यह देश कोई धर्मशाला नहीं है। घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें बाहर निकाला जाएगा।
शाह के इस बयान को शिवसेना (यूबीटी) में चल रही अंदरूनी हलचल से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी के कुछ नेताओं के शिंदे गुट की ओर रुख करने की चर्चाएं तेज हैं।
महाराष्ट्र राजनीति पर असर
अमित शाह के बयान और संजय राउत की प्रतिक्रिया ने महाराष्ट्र में सियासी तापमान बढ़ा दिया है। महायुति गठबंधन में यह बयान शिंदे गुट को मजबूती देने वाला माना जा रहा है।
दूसरी ओर शिवसेना (यूबीटी) इसे अपने अस्तित्व पर हमला मान रही है। पार्टी ने शाह के दावे को खारिज करते हुए इसे मराठी मानुस का अपमान बताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और भविष्य की रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है। दोनों पक्ष अब एक-दूसरे पर हमले तेज करने की तैयारी में दिख रहे हैं।
संजय राउत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि शिवसेना (यूबीटी) बालासाहेब ठाकरे की असली विरासत की रक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि जनता ऐसे विश्वासघात को माफ नहीं करेगी।
महाराष्ट्र की राजनीति में यह नया दौर फिर से सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी लड़ाई का संकेत दे रहा है। अमित शाह का बयान और राउत की प्रतिक्रिया दोनों ही पक्षों के रणनीतिक कदम लग रहे हैं।
वर्तमान में स्थिति यह है कि शिवसेना (यूबीटी) अपनी एकजुटता बनाए रखने की कोशिश कर रही है, जबकि शिंदे गुट और भाजपा मिलकर इसे कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहे दिख रहे हैं।










