नई दिल्ली। पीडीपी चीफ और पूर्व जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने लद्दाखी कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का समर्थन किया है। महबूबा ने कहा कि सोनम वांगचुक Gen-Z यानी युवा पीढ़ी के भविष्य की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर वांगचुक की हड़ताल की सराहना की। उन्होंने लिखा कि शिक्षा व्यवस्था में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं और युवाओं का भविष्य खतरे में है। वांगचुक इस मुद्दे को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं।
महबूबा का बयान
महबूबा मुफ्ती ने कहा, “सोनम वांगचुक Gen-Z के भविष्य को बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा रहे हैं। सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।” उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा में अनियमितताओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
उन्होंने वांगचुक से हड़ताल समाप्त करने की अपील भी की, लेकिन साथ ही कहा कि सरकार को उनकी मांगों को स्वीकार करना चाहिए ताकि वह हड़ताल खत्म करें।
वांगचुक की हड़ताल
सोनम वांगचुक जंतर मंतर पर 18वें दिन भी भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। उनकी मुख्य मांगें NEET और CBSE परीक्षाओं में पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी हैं।
हड़ताल के दौरान उनकी सेहत बिगड़ रही है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक हड़ताल जारी रखने से जान को खतरा हो सकता है।
विपक्षी दलों का समर्थन
महबूबा मुफ्ती के अलावा कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी वांगचुक का समर्थन किया है। अरविंद केजरीवाल, राकेश टिकैत, डिंपल यादव और अन्य नेताओं ने जंतर मंतर पहुंचकर उनका साथ दिया। फिल्म इंडस्ट्री से भी इमरान खान, सोनाक्षी सिन्हा समेत कई कलाकारों ने समर्थन जताया है।
सरकार की स्थिति
केंद्र सरकार अभी तक इस मामले पर कोई बड़ा बयान नहीं दे पाई है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर विपक्ष लगातार हमला बोल रहा है। कई सांसदों ने संसद में इस मुद्दे को उठाने की तैयारी कर ली है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर वांगचुक की हड़ताल को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। लाखों लोग उनकी हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं। कई छात्र संगठन और युवा उनके समर्थन में सड़कों पर उतर आए हैं।
निष्कर्ष
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुकी है। महबूबा मुफ्ती जैसे प्रमुख नेताओं के समर्थन से यह मुद्दा और ताकतवर हो गया है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है और वांगचुक अपनी हड़ताल कब समाप्त करते हैं।
युवाओं के भविष्य और शिक्षा सुधार का यह मुद्दा पूरे देश का मुद्दा बन चुका है।









